आगरा। जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला परामर्शदात्री समिति एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति यानी डीसीसी/डीएलआरसी की जून 2026 की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बैंकिंग सुविधाओं, ऋण योजनाओं, वित्तीय समावेशन और विभिन्न सरकारी स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि जून 2026 तक आगरा जिले का ऋण-जमा अनुपात करीब 72.70 प्रतिशत रहा, जो आरबीआई के 60 प्रतिशत के मानक से अधिक है। जिलाधिकारी ने जिन बैंकों का ऋण-जमा अनुपात मानक से कम है, उन्हें इसमें सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुद्रा लोन, स्वयं सहायता समूहों और व्यापारियों को खुदरा ऋण उपलब्ध कराकर जिले का ऋण-जमा अनुपात और बढ़ाने पर जोर दिया।
वित्तीय समावेशन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में करीब 20 लाख 48 हजार जनधन खाते खोले जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने निजी बैंकों को भी जनधन खाते खोलने और ग्रामीण तथा पिछड़े क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए। साथ ही बैंक मित्रों और वित्तीय साक्षरता सलाहकारों के माध्यम से गांव और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता शिविर लगाने को कहा।
बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना की विशेष रूप से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने लंबित और निरस्त आवेदनों पर नाराजगी जताई। उन्होंने 10 निरस्त और 10 लंबित आवेदकों को बैठक में बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित बैंक अधिकारियों से प्रत्येक मामले में आवेदन लंबित या निरस्त करने का कारण पूछा।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित बैंक के विजिलेंस अधिकारी को पत्र भेजकर मामलों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ऋण स्वीकृति के नाम पर आवेदकों से किसी भी प्रकार की अनुचित धनराशि मांगे जाने की शिकायतों की भी जांच कराने को कहा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पात्र आवेदनों को बिना उचित और वैधानिक कारण के लंबित या निरस्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पात्र युवाओं को शासन की मंशा के अनुरूप समयबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराना बैंकों की जिम्मेदारी है। अनावश्यक रूप से बैंक के चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शैक्षिक ऋण की समीक्षा में बताया गया कि जून तिमाही तक जिले में 238 शैक्षिक ऋण स्वीकृत किए गए और करीब 19 करोड़ 82 लाख रुपये के 930 ऋण वितरित किए गए। वहीं कुछ निजी बैंकों की खराब प्रगति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए उनके प्रतिनिधियों को तलब किया।
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना, पीएम मुद्रा योजना, एनआरएलएम, पीएम स्वनिधि, किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन ऋण, मत्स्य पालन ऋण और पीएमएफएमई योजना सहित विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत मिट्टी से जुड़े कारीगरों और कुशल लोगों को आसान ऋण उपलब्ध कराने तथा उनके कौशल और पारंपरिक कला के संरक्षण पर जोर दिया। पीएमएफएमई योजना में लंबित आवेदनों का 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, अग्रणी जिला प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी, प्रबंधक आरबीआई श्री संदीप शर्मा, प्रबंधक श्री सौरभ शर्मा, संबंधित विभागों के अधिकारी तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।





