आगरा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रहा है। अछनेरा विकासखंड के ग्राम साधन निवासी गजेंद्र पाल सिंह की दो वर्षीय बेटी लविश्का के दिल में जन्मजात छेद था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार बच्ची का इलाज कराने में असमर्थ था, लेकिन आरबीएसके के माध्यम से लविश्का का निःशुल्क उपचार और सफल सर्जरी संभव हो सकी।लविश्का का जन्म 24 नवंबर 2024 को हुआ था। जन्म के कुछ समय बाद परिजनों को पता चला कि उसके दिल में छेद है। इलाज महंगा होने के कारण परिवार के सामने बड़ी चिंता खड़ी हो गई। इसी दौरान क्षेत्रीय आशा कार्यकर्ता और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से परिवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी मिली।इसके बाद अछनेरा विकासखंड की आरबीएसके टीम-बी की डॉ. लता मिश्रा, डॉ. दीप्ति बरूण, ऑप्टोमेट्रिस्ट संतोष कुमार और एएनएम अनीता कौशिक ने बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण किया। टीम ने परिजनों को सरकारी योजना के तहत मिलने वाली निःशुल्क उपचार सुविधाओं की जानकारी दी।जनपद स्तर पर डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा के सहयोग से लविश्का को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में संदर्भित किया गया। वहां बच्ची की सभी आवश्यक जांचें निःशुल्क कराई गईं। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने लविश्का की सफल निःशुल्क सर्जरी की। उपचार का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया गया।बेटी के सफल उपचार के बाद गजेंद्र पाल सिंह और उनके परिवार ने आरबीएसके टीम एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया। परिजनों ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और सरकारी योजना के तहत निःशुल्क इलाज मिलने से उनकी बेटी को नया जीवन मिला है।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। योजना के तहत जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां तथा शारीरिक विकास में देरी एवं विकलांगता सहित 47 प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। उपचार एवं आवश्यक दवाइयों का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है।आरबीएसके नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर आरबीएसके की समर्पित टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित भ्रमण करती हैं। टीमों द्वारा बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है और गंभीर अथवा योजना के अंतर्गत आने वाली बीमारी पाए जाने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए संदर्भित किया जाता है।जनपद आगरा में आरबीएसके के माध्यम से जन्मजात एवं गंभीर रोगों से जूझ रहे बच्चों को लगातार निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 152 बच्चों तथा वर्ष 2026-27 में अब तक 76 बच्चों को उपचार मिल चुका है। यानी पिछले दो वर्षों में अब तक 228 बच्चों को आरबीएसके के माध्यम से नई जिंदगी मिली है।आरबीएसके की यह पहल न केवल बच्चों की गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित कर रही है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ने वाले महंगे इलाज के बोझ को भी कम कर रही है।





