आगरा। नस्ल सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत मादा गौवंशों में सेक्स्ड शॉर्टेड वीर्य के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान कर उच्च उत्पादन क्षमता वाली बछिया के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार, 21 सितंबर 2026 को विकास भवन सभागार, आगरा में मंडल स्तरीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर गोवत्सों की पैदावार कम करने तथा बेहतर नस्ल एवं अधिक उत्पादन क्षमता वाली बछिया तैयार करने की तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी, आगरा श्रीमती प्रतिभा सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आगरा मंडल के अपर निदेशक ग्रेड-1 डॉ. देवेंद्र पाल सिंह तथा मुख्य पशुचिकित्साधिकारी आगरा डॉ. डी.के. पांडेय ने की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंडल के विभिन्न जनपदों से पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। इनमें मथुरा के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. एन.एन. शुक्ला, फिरोजाबाद के डॉ. सोमेश गुप्ता, मैनपुरी के डॉ. सऊद हसन, संयुक्त निदेशक वेटरनरी गायनेकोलॉजी डॉ. अरुण सिंह तथा संयुक्त निदेशक वेटरनरी पैथोलॉजी डॉ. जितेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन जनपद आगरा की उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक्ला ने किया। इसमें आगरा मंडल के सभी ब्लॉक स्तरीय उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्सा अधिकारी और पशुधन प्रसार अधिकारियों ने भाग लिया।
उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद से पहुंची टीम के डॉ. मंजीत और डॉ. स्वप्निल देशमुख ने वर्गीकृत यानी सेक्स्ड शॉर्टेड वीर्य के उपयोग से अधिक से अधिक उच्च उत्पादन क्षमता वाली बछिया के उत्पादन पर जोर दिया। उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक, इसके लाभ और नस्ल सुधार कार्यक्रम में इसकी उपयोगिता के संबंध में प्रशिक्षण दिया।
वहीं, दुवासु मथुरा के फिजियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुकुल आनंद ने गायों में सही समय पर सेक्स्ड शॉर्टेड वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान किए जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान की सफलता के लिए उचित समय का चयन और निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेक्स्ड शॉर्टेड वीर्य के माध्यम से नस्ल सुधार और उच्च उत्पादन क्षमता वाली बछिया के उत्पादन को बढ़ावा देने की तकनीकी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही मंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।






