आगरा, 6 अक्टूबर। जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान अक्टूबर-2026 की जनपद स्तरीय अंतरविभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने 1 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान और 12 से 31 अक्टूबर तक प्रस्तावित दस्तक अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने डेंगू-मलेरिया की स्थिति, फॉगिंग, एंटी-लार्वा गतिविधियों, साफ-सफाई, जलभराव नियंत्रण, माइक्रो प्लान और जनजागरूकता अभियानों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए सतर्कता, स्रोत नियंत्रण और समयबद्ध कार्रवाई बेहद जरूरी है।उन्होंने निर्देश दिए कि डेंगू की जांच में पुष्टि नहीं होने के बावजूद डेंगू जैसे लक्षण वाले मामलों को गंभीरता से लिया जाए। ऐसे मामलों में आवश्यक जांच कराने के साथ क्षेत्रवार निगरानी और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर तत्काल स्रोत नियंत्रण की कार्रवाई की जाए। केवल डेंगू पॉजिटिव मामलों के आधार पर किसी क्षेत्र की स्थिति का आकलन न किया जाए।जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को सीएचसी, पीएचसी, सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के साथ निजी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों से भी प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। डेंगू जैसे लक्षण वाले मामलों की समयबद्ध और क्षेत्रवार रिपोर्टिंग व्यवस्था मजबूत करने को कहा, ताकि किसी क्षेत्र में मामलों में असामान्य वृद्धि होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।स्वास्थ्य केंद्रों की पैथोलॉजी लैब में सीबीसी, मलेरिया सहित आवश्यक जांचों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने सीएचसी प्रभारियों को लैब तकनीशियनों के साथ नियमित समीक्षा करने तथा जांच परिणामों का विश्लेषण करने को कहा, जिससे बीमारी की स्थिति में होने वाले बदलाव की समय से पहचान की जा सके।जलभराव और मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर कार्रवाईजिलाधिकारी ने कहा कि मच्छरजनित रोगों की रोकथाम में स्रोत नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण है। जहां लार्वा मिले, वहां तत्काल एंटी-लार्वा और स्रोत नियंत्रण की कार्रवाई की जाए। आसपास के घरों की भी जांच कराई जाए। कूलर, गमले, पुराने टायर, गड्ढों, फ्रिज-एसी के आसपास जमा पानी और अन्य जलभराव वाले स्थानों को नियमित रूप से साफ कराया जाए।उन्होंने पंचायती राज विभाग को गांवों में नालियों की सफाई, जलभराव समाप्त करने, गंदे एवं सेप्टिक पानी की निकासी तथा स्वच्छता गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत सचिवों को जलभराव वाले स्थान चिन्हित कर माइक्रो प्लान के अनुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।डीएम ने स्पष्ट किया कि केवल फोटो भेजना किसी कार्य की पूर्णता का प्रमाण नहीं है। गांवों में वास्तव में गतिविधियां हुई हैं या नहीं, इसका मौके पर सत्यापन कराया जाए। गतिविधिवार फोटो और रिपोर्ट लेने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि एक ही स्थान की तस्वीरों के आधार पर पूरे गांव में कार्य पूरा होने की रिपोर्ट न दी जाए।वार्डवार फॉगिंग और सफाई की निगरानीजिलाधिकारी ने प्रत्येक वार्ड और गांव में आवश्यकता के अनुसार फॉगिंग, एंटी-लार्वा गतिविधि और विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए। फॉगिंग एवं सफाई की ब्लॉक और वार्डवार रिपोर्ट के साथ फोटो प्राप्त कर नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया।उन्होंने सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और वास्तविक कार्य की सख्ती से निगरानी करने के निर्देश दिए। जहां सफाई कर्मचारियों की कमी हो, वहां स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था कर नालियों, तालाबों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई कराने को कहा।नगर निगम को शहर के सभी वार्डों में जलभराव वाले स्थानों और गड्ढों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नगर निगम के वाहनों में डेंगू-मलेरिया से बचाव संबंधी जागरूकता जिंगल चलाने और होर्डिंग्स के माध्यम से लोगों को जागरूक करने को कहा गया।स्कूलों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देशजिलाधिकारी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों को भी संचारी रोग नियंत्रण अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आसपास गड्ढों, पुराने टायर, कूलर, गमलों और अन्य स्थानों पर जमा पानी तथा मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों की पहचान के लिए प्रेरित किया जाए।विद्यालय परिसरों में साफ-सफाई और जलभराव की नियमित जांच कराने के साथ विद्यार्थियों की सहभागिता से स्वच्छता एवं श्रमदान गतिविधियां आयोजित करने पर भी जोर दिया गया। परिसर में झाड़ियों, घास-फूस और जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है। पंचायती राज, नगर निगम, आईसीडीएस, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, कृषि, पशुपालन सहित सभी संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी के अनुसार सक्रिय भूमिका निभाएं।उन्होंने अधिकारियों को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अभियान की प्रत्येक गतिविधि की माइक्रो प्लान के अनुसार समीक्षा और सत्यापन करने तथा लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी निर्धारित करने को कहा। बैठक में अनुपस्थित सीएचसी और यूपीएचसी प्रभारियों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर एवं अन्य पानी के पात्रों की नियमित सफाई करें। बुखार या डेंगू-मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच और उपचार कराएं।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ डॉ. पीयूष जैन, डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, जिला मलेरिया अधिकारी राजेश कुमार, बीएसए राकेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, पीडी डीआरडीए रेणु कुमारी सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।





