आगरा, 6 अक्टूबर। यमुना नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए आगरा में नालों की टैपिंग और सीवरेज शोधन की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण, पुराने एसटीपी की क्षमता और नालों की टैपिंग के जरिए यमुना में अशोधित सीवरेज के सीधे प्रवाह को रोकने की दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है।एडीएम नमामि गंगे जुबेर बेग ने बताया कि आगरा शहर में कुल 90 नाले हैं, जिनसे करीब 286 एमएलडी सीवरेज का डिस्चार्ज होता है। इनमें से 24 नाले पूरी तरह और 5 नाले आंशिक रूप से टैप किए जा चुके हैं। इनसे निकलने वाले सीवरेज का शोधन 9 एसटीपी के माध्यम से किया जा रहा है, जिनकी कुल क्षमता 220 एमएलडी है।नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत आगरा सीवरेज योजना में 31 एमएलडी क्षमता के जगनपुर एसटीपी, 35 एमएलडी के पीलाखार एसटीपी और 100 एमएलडी के धांधूपुरा एसटीपी समेत 10 डीएसटीपी के कार्य कराए जा रहे हैं। जगनपुर और पीलाखार एसटीपी का कार्य पूरा होने के बाद इनका संचालन क्रमशः नवंबर 2025 से किया जा रहा है। वहीं, 100 एमएलडी धांधूपुरा एसटीपी का परीक्षण और ट्रायल 31 अगस्त 2026 से शुरू हो चुका है।10 डीएसटीपी के तहत 23 नालों की टैपिंग की जाएगी। इन कार्यों को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा शेष 38 अनटैप्ड नालों और 5 आंशिक रूप से टैप नालों की पूर्ण टैपिंग के लिए प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से स्वीकृति मिल चुकी है। निविदा प्रक्रिया के बाद कार्य प्रगति पर है और इसे नवंबर 2026 तक पूरा करने का प्रस्तावित लक्ष्य है।अधिकारियों के अनुसार नालों की टैपिंग, एसटीपी और डीएसटीपी के निर्माण तथा सीवरेज शोधन की व्यवस्था पूरी होने के बाद नगर निगम क्षेत्र के किसी भी नाले का अशोधित सीवरेज सीधे यमुना में प्रवाहित नहीं होगा। इससे यमुना में प्रदूषित जल के सीधे प्रवाह पर प्रभावी रोक लगाने के साथ नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गति मिलेगी।





