लघु उद्योग भारती के 33वें स्थापना दिवस समारोह में आत्मनिर्भर भारत, MSME सशक्तिकरण एवं आगरा के औद्योगिक विकास पर हुआ व्यापक मंथन

लघु उद्योग भारती के 33वें स्थापना दिवस समारोह में आत्मनिर्भर भारत, MSME सशक्तिकरण एवं आगरा के औद्योगिक विकास पर हुआ व्यापक मंथन लघु उद्योग भारती..

लघु उद्योग भारती के 33वें स्थापना दिवस समारोह में आत्मनिर्भर भारत, MSME सशक्तिकरण एवं आगरा के औद्योगिक विकास पर हुआ व्यापक मंथन लघु उद्योग भारती के स्थापना दिवस पर MSME सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत पर मंथन**“विरासत से विकास तक” थीम पर आगरा के लघु उद्योगों के स्वर्णिम सफर की हुई चर्चा, आगरा के पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर**MSME भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़, युवाओं को उद्यमिता से जुड़ने का आह्वान,लघु उद्योग भारती के 33वें स्थापना दिवस समारोह में उद्योग विकास और TTZ मुद्दों पर उठी आवाज**आगरा बनेगा देश का प्रमुख MSME मॉडल- लघु उद्योग भारती**उद्यम, कौशल और स्वदेशी उत्पादन ही आगरा की वास्तविक पहचान-मा. जनपद प्रभारी मंत्री*आगरा 24/05/2026/आज लघु उद्योग भारती आगरा द्वारा आयोजित 33वें स्थापना दिवस समारोह का भव्य आयोजन अतिथि वन, आगरा में संपन्न हुआ। “विरासत से विकास तक आगरा के लघु उद्योगों का स्वर्णिम सफर”रहा, जिसमें आगरा के पारंपरिक एवं आधुनिक लघु उद्योगों की उपलब्धियों, चुनौतियों, संभावनाओं एवं आत्मनिर्भर भारत में उनकी भूमिका पर विस्तृत परिचर्चा एवं मंथन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री जयवीर सिंह जी, मंत्री, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मधुसूदन दादू जी एवं उपस्थित श्री राकेश गर्ग जी, अध्यक्ष – उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड एवं राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री, लघु उद्योग भारती द्वारा की गई।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं भगवान विश्वकर्मा तथा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। तत्पश्चात संगठन की 33 वर्षों की गौरवगाथा, उपलब्धियों एवं राष्ट्र निर्माण में MSME की भूमिका पर विशेष प्रस्तुति दी गई।अपने स्वागत उद्बोधन में जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता जी ने कहा कि लघु उद्योग भारती पिछले 33 वर्षों से राष्ट्रहित, उद्योगहित एवं समाजहित के भाव के साथ देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को संगठित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज MSME भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि वर्ष 1993-94 में आर्थिक उदारीकरण के दौर में जब छोटे उद्योग संघर्ष कर रहे थे, तब राष्ट्रवादी चिंतन से प्रेरित उद्यमियों ने लघु उद्योग भारती की स्थापना की। आज संगठन देश के 27 राज्यों एवं सैकड़ों जिलों में सक्रिय होकर 70 हजार से अधिक उद्योग सदस्यों की प्रभावी आवाज बन चुका है।उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि देश में लघु उद्योग मंत्रालय की स्थापना एवं MSME सेक्टर को स्वतंत्र पहचान दिलाने की विचार चेतना को राष्ट्रीय स्वर देने में लघु उद्योग भारती की ऐतिहासिक भूमिका रही है।माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में पहली बार लघु उद्योग मंत्रालय को सशक्त स्वरूप प्रदान किया गया तथा आदरणीय श्रीमती वसुंधरा राजे जी ने प्रथम केंद्रीय मंत्री के रूप में इसकी जिम्मेदारी संभाली।मुख्य अतिथि माननीय श्री जयवीर सिंह जी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार MSME एवं स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगरा के पारंपरिक उद्योगों की सराहना करते हुए कहा कि “विरासत से विकास तक” की थीम वास्तव में आगरा की औद्योगिक पहचान को प्रदर्शित करती है।जिलाध्यक्ष द्वारा आगरा के उद्यमियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी प्रमुखता से रखा गया। उन्होंने कहा कि TTZ की बाध्यताओं एवं उद्योगों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान हेतु लघु उद्योग भारती निरंतर हर स्तर पर सक्रियता से कार्य कर रही है तथा शीघ्र ही इसके सकारात्मक परिणाम उद्यमियों के सम्मुख होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मधुसूदन दादू जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि लघु उद्योग भारती केवल संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी आर्थिक विचारधारा का आंदोलन है। उन्होंने MSME को भारत की आर्थिक शक्ति बताते हुए युवाओं को उद्यमिता से जुड़ने का आह्वान किया।अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री राकेश गर्ग जी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम ने कहा कि उत्तर प्रदेश एवं देश का औद्योगिक विकास MSME सेक्टर के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि लघु उद्योग भारती उद्योगों की समस्याओं को नीति निर्माण के केंद्र तक पहुंचाने का कार्य निरंतर कर रही है।कार्यक्रम के अंतर्गत “विरासत से विकास तक आगरा के लघु उद्योगों का स्वर्णिम सफर” विषय पर विशेष परिचर्चा एवं मंथन आयोजित किया गया, जिसमें आगरा के प्रमुख उद्योगों जूता एवं लेदर, पेठा, मार्बल एवं स्टोन हैंडीक्राफ्ट, फाउंड्री एवं इंजीनियरिंग, जरी-जरदोजी, गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग एवं अन्य MSME क्षेत्रों के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आगरा केवल ऐतिहासिक विरासत की नगरी नहीं, बल्कि उद्यमिता, कौशल और स्वदेशी उत्पादन की जीवंत राजधानी है।चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि यदि परंपरागत उद्योगों को आधुनिक तकनीक, बेहतर नीति, निर्यात प्रोत्साहन एवं नवाचार से जोड़ा जाए, तो आगरा देश के सबसे बड़े MSME मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।वक्ताओं ने कहा – “आगरा की विरासत केवल स्मारकों में नहीं बसती, आगरा की असली पहचान उसके उद्यम, कौशल और उद्योगों की जीवंत परंपरा में बसती है।”कार्यक्रम का संचालन प्रदेश सचिव श्री मनीष अग्रवाल जी द्वारा प्रभावी एवं ओजपूर्ण शैली में किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि लघु उद्योग भारती केवल एक औद्योगिक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी आर्थिक चेतना का सशक्त मंच है, जो देशभर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को संगठित कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम की थीम “विरासत से विकास तक : आगरा के लघु उद्योगों का स्वर्णिम सफर” को आगरा की औद्योगिक पहचान एवं भविष्य की संभावनाओं से जोड़ते हुए कहा कि परंपरागत उद्योगों को आधुनिक तकनीक, नवाचार एवं बेहतर नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।कार्यक्रम में ब्रज प्रांत अध्यक्ष श्री राकेश अग्रवाल जी, प्रदेश सचिव श्री गौरव मित्तल जी, ब्रज प्रांत महासचिव श्री अमलेन्द्र जी तथा राष्ट्रीय सचिव श्री दीपक अग्रवाल जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम प्रभारी CA आलोक अग्रवाल जी ने कार्यक्रम की सफलता हेतु सभी अतिथियों एवं उद्यमियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम संयोजक CA नितेश गुप्ता जी ने संगठन की ओर से सभी आगंतुकों, उद्यमियों महासचिव राजीव बंसल एवं कोषाध्यक्ष संजीव जैन जी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।कार्यक्रम में आगरा के जूता एवं लेदर उद्योग, पेठा उद्योग, मार्बल एवं स्टोन हैंडीक्राफ्ट, फाउंड्री एवं इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग, जरी-जरदोजी, गारमेंट, सिल्वर एवं अन्य MSME क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर उद्योगों के विकास एवं विस्तार पर अपने विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में संगठन के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई, जिनमें विशेष रूप से – संजीव अग्रवाल जी, ऋषि नंद जी, नवदीप अग्रवाल जी, अरविंद शुक्ला जी, CA निखिल गुप्ता जी, शैलेश अग्रवाल जी, अतुल अग्रवाल जी, विशाल सिंगल जी, संजय गोयल जी, मोहित जी, अभिनव रस्तोगी जी, राजीव मोदी जी, शिव बहादुर सिंह जी, आलोक आर्य जी, गोविंद अग्रवाल जी, पंकज अग्रवाल जी, दिनेश गुप्ता जी, अंकुर अग्रवाल जी, विकास चौबे जी, प्रवीण अग्रवाल जी, अमित बंसल जी, अर्जुन गुप्ता जी, सौरभ गुप्ता जी, शिविर जैन जी, CS अनुज अशोक जी, समक्ष जैन जी एवं पुनीत अग्रवाल जी सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्यों का विशेष योगदान रहा।..

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