आगरा में आज जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल जी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में 27वें कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी तथा पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में विभिन्न युद्धों में राष्ट्र के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, कारगिल युद्ध के वीर जवानों के परिवारों को अंगवस्त्रम और उपहार देकर सम्मानित करने के साथ,वीर नारियों एवं पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया।जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल जी ने इस अवसर पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लिए बलिदान, “परम बलिदान” है, देश की सीमाओं की रक्षा हेतु जान न्योछावर करने की शब्दों में कृतज्ञता बयान नहीं की जा सकती, प्रतिवर्ष कारगिल विजय दिवस पर हम सभी अपने अमर शहीदों को याद करते हैं, जिलाधिकारी ने कहा कि पूर्व सैनिक समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, उनका उत्साह, ऊर्जा, अपने देश व समाज के प्रति रिटायरमेंट के बाद भी अनुकरणीय है, उन्होंने पूर्व सैनिकों का आह्वान करते हुए कहा कि अपने अनुभव, जज्बा से देशभक्ति से ओतप्रोत अच्छे नागरिकों को तैयार करने में भूमिका निभाएं, अपने आसपास, कॉलोनी में देश के गौरवमयी संघर्ष यात्रा, युद्धों के इतिहास के बारे में आगामी पीढ़ी को जानकारी दें, आप, हम सभी ने जो भारत देखा है, नई जेनरेशन जो भारत देख रही है दोनों की स्थिति अलग है जिलाधिकारी ने कहा कि मिलेनियर,जेन-जी, जेन – अल्फ़ा पीढ़ियों की सोच व काम करने के तरीके अलग है, देश के प्रति उनमें सकारात्मक सोच का विकास, संविधान,सामाजिक मूल्यों के संस्कार देने, आगामी विकसित भारत हेतु अपने समृद्ध इतिहास को याद करने, आगे बढ़ने, सशक्त देश निर्माण हेतु अपना योगदान दें, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों के साथ प्रशासन अपनी सकारात्मक भूमिका हेतु साथ है। जिलाधिकारी ने वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया, उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का त्याग हम सभी को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।27वां कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित गोष्ठी में पूर्व सैनिकों, अधिकारियों, वक्ताओं ने संबोधित किया, गोष्ठी में बताया गया कि कारगिल विजय दिवस 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को याद करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों से देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए एक-एक इंच भूमि को मुक्त कराया था।कारगिल विजय दिवस भारतीय इतिहास में शौर्य और राष्ट्र प्रेम का प्रतीक है। इस दिन देश, उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिन्होंने विश्व के सबसे दुर्गम युद्ध क्षेत्रों में से एक में असाधारण पराक्रम दिखायाकारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों, खुफिया समन्वय, सीमा अवसंरचना और सैन्य आधुनिकीकरण में व्यापक सुधार किए हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन, सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और सुरंग निर्माण, आधुनिक निगरानी प्रणाली और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने जैसे कदमों ने देश की सामरिक क्षमता को मजबूत किया है।गोष्ठी में अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल श्री अमरेंद्र कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हेमंत कुमार,जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कैप्टन सुनील कुमार सहित पूर्व सैनिक, वीर नारियों, शहीदों के आश्रितों की मौजूदगी रही।








