आगरा। आगरा नगर निगम द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, नाला सफाई और कचरा परिवहन के लिए जारी किए गए नए आरएफआई/टेंडर (RFI No.-805/D/SNA/26) को लेकर सफाई कर्मचारियों, सफाई मित्रों और ड्राइवरों में असंतोष बढ़ने लगा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहर के चारों जोन और 100 वार्डों की सफाई व्यवस्था तथा वाहनों के संचालन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इसको लेकर कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। कर्मचारियों के रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता नगर निगम में वर्षों से सेवाएं दे रहे सफाई मित्रों, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और ड्राइवरों को आशंका है कि नई व्यवस्था लागू होने से उनकी नौकरी और रोजगार की स्थिति प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से शहर की सफाई व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उन्हें रोजगार संबंधी अनिश्चितताओं का सामना न करना पड़े। वेतन और सुविधाओं में कटौती की आशंका कर्मचारियों ने निजी कंपनी के माध्यम से कामकाज संचालित होने पर वेतन में कटौती, मानदेय के भुगतान में देरी और ईपीएफ तथा ईएसआई जैसी सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले कर्मचारियों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी हितों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।बाहरी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपने पर उठे सवाल टेंडर को लेकर यह चर्चा भी है कि आगरा की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी भोपाल या अन्य राज्यों की किसी कंपनी को सौंपी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित कंपनी के चयन की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। कर्मचारियों का सवाल है कि नई एजेंसी के चयन के दौरान स्थानीय परिस्थितियों, मौजूदा कर्मचारियों के अनुभव और उनके रोजगार की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जाएगी। नगर निगम के संसाधनों के इस्तेमाल पर भी चिंता प्रस्तावित टेंडर को लेकर नगर निगम के मौजूदा वाहनों, वर्कशॉप और अन्य संसाधनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस ठेके की अवधि 10 वर्ष प्रस्तावित बताई जा रही है, जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाने का विकल्प भी हो सकता है। कर्मचारियों का मानना है कि इतने लंबे समय के लिए सफाई व्यवस्था निजी एजेंसी को सौंपने से पहले सभी पहलुओं पर पारदर्शी तरीके से विचार किया जाना चाहिए।टेंडर रद्द या स्थगित करने की मांगकर्मचारी संगठनों और सफाई मित्रों ने नगर निगम प्रशासन से नए टेंडर की प्रक्रिया को तत्काल रद्द या स्थगित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों के रोजगार, वेतन और अन्य सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया और प्रस्तावित निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन और कार्य बहिष्कार का रास्ता अपना सकते हैं। इससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन कर्मचारियों की चिंताओं पर क्या रुख अपनाता है और प्रस्तावित टेंडर को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
संवाददाता: राम माहौर





